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आपके दादा-दादी, चाचा-चाची और कुछ परिचितों को ब्लड प्रेशर की समस्या जरूर होगी। बहुत से लोग कहते हैं कि वे रक्तचाप(Blood Pressure) से पीड़ित हैं।आप सोच सकते हैं कि ब्लड प्रेशर और ब्लड प्रेशर होना कोई बीमारी है! लेकिन यह गलत है।

Blood Pressure क्या होता है ?

हृदय कुएं पर लगे पंप की तरह कार्य करता है। हृदय समान संकुचन के साथ पूरे शरीर में दबाव में रक्त का वहन करता है। रक्त दबाव में भेजा जाता है, इसलिए यह लेटने, बैठने, खड़े होने या सिर के बल लेटने से शरीर के सभी अंगों तक पहुंच सकता है। इस दबाव को रक्तचाप (Blood Pressure) कहते हैं।

Blood Pressure कैसे मापते हैं ?

इस ब्लड प्रेशर को प्लेट जैसी या Mercury डिवाइस से मापा जाता है। सामान्य: एक स्वस्थ वयस्क का रक्तचाप (Blood Pressure) 120-80 होता है। (इसे पारे के मि.मी के रूप में व्यक्त किया जाता है।) इसमें से 120 दबाव तब है जब हृदय सिकुड़ रहा होता है (सिस्टोलिक) और 80 दबाव तब होता है जब हृदय फैल रहा होता है (डायस्टोलिक)। सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 160 से ऊपर या डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 95 से ऊपर जाता है तब उसे उच्च रक्तचाप/High Blood Pressure कहा जाता है।

High Blood Pressure का क्या कारण है ?

भारत में, शहरी क्षेत्रों में 20 से 60 वर्ष के आयु वर्ग के 7% पुरुष और 6% महिलाएं उच्च रक्तचाप(High Blood Pressure) से पीड़ित हैं। बढ़ती उम्र के साथ रक्तचाप धीरे-धीरे बढ़ता है। हाई ब्लड प्रेशर के पीछे जेनेटिक्स (आनुवंशिकी) भी एक कारण हो सकता है। मोटे लोग (Fat Person), जो लोग बहुत अधिक नमक (7 से 8 ग्राम प्रति दिन से अधिक) खाते हैं, जो लोग अपने आहार में बहुत अधिक घी खाते हैं, शराब पीते हैं, व्यायाम नहीं करते हैं और जो लोग तनाव में रहते हैं, उनमें दूसरों की तुलना में उच्च रक्तचाप(High Blood Pressure) विकसित होने की संभावना अधिक होती है। गुर्दे (Kidney) और अन्य अंगों के रोग भी उच्च रक्तचाप का कारण बन सकते हैं।

हाई ब्लड प्रेशर (High BP) के लक्षण क्या हैं ?

लगातार सिर दर्द (Persistent Head Ache) अंगों में कंपन (Tremors in limbs), सीने में धड़कन (palpitation in chest), चक्कर आना (dizziness), अंगों में जलन (Burning in limbs), सीने में दर्द (Chest pain) यह सब हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लोगों को तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

High Blood Pressure को कैसे नियंत्रित (Control Blood Pressure) किया जा सकता है ?

शुरुआत में नमक कम करना, शराब छोड़ना, डाइट में फैट कम करना और कंपोज जैसी गोलियां लेने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल हो सकता है। लेकिन अगर ब्लड प्रेशर हाई(High Blood Pressure) है तो ब्लड प्रेशर कम करने वाली गोलियां लेनी पड़ती हैं। आमतौर पर इन दवाओं को जीवन भर बाद में लेना पड़ता है। रोगी को अपने आप खुराक कम नहीं करनी चाहिए और गोलियों को बदलना या बंद नहीं करना चाहिए। नहीं तो उसे ब्रेन हेमरेज, पैरालिसिस जैसे गंभीर परिणाम होने की संभावनाएं हो सकती हैं। उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए आहार में उचित बदलाव और विशेषज्ञ की सलाह से ली जाने वाली दवाओं के अलावा अन्य कोई उपाय करने की आवश्यकता नहीं है। ऐसा करने से वह जीवन भर नियंत्रण में रहता है। यदि उच्च रक्तचाप का शीघ्र निदान किया जाता है, तो तत्काल उपचार शुरू किया जाता है और बाद में कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। उसके लिए 40 वर्ष की आयु में प्रवेश कर चुके सभी व्यक्तियों को अपना ब्लड प्रेशर चेक कराना चाहिए। दूसरे, उन्हें अपने ब्लड प्रेशर के रिकॉर्ड और इलाज की जानकारी को एक डायरी में ठीक से रखना चाहिए। यानी आगे के इलाज में फायदा होता है।

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